Sunday, December 29, 2024

हिन्दी लघुकथा (अङ्क १९ मा प्रकाशित)

खिलौना

- डा. संजय राय 'रंगकर्मी–चित्रकार'
शिवनारायण रोड, कच्चीघाट, पटना 800 008,  भारत  


चौराहे से सटे कूडेदान के पास रुक–रुक कर भीड़लग रही थी ! मैले–कुचैले फटे–चिथडे में लिपटी विक्षिप्त युवती को खिलौने से खेलते देख बर्बस किसी न किसी के मुंह से निकल आते…… “हे ईश्वर ऐसा दिन किसी को ना दिखाएं…!’’ 

“किसी की बहन बेटी ही तो होगी… बेचारी भरी जवानी में दिमागी संतुलन खो बैठी…!’’ उसके पास से गुजरते हुए कभी कोई कपडे तो कोई खाने की सामग्री फेंक कर आगे बढ़जाते ! वही एक भिखारीन अपने कंबल से उसके उघडे हुए बदन को ढकते हुए ऊपर वाले को कोस रही थी ! उधर मनचलों की टोलियां नए खिलौने देख खेलने को आतुर चौराहे के चक्कर लगाते हुए अंधेरा होने का बाट जोह रहे थे !




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