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Wednesday, January 21, 2026

हिन्दी लघुकथा (अङ्क ३१ मा प्रकाशित)


दो दोस्त थे– चन्दू और विमल । विमल, चन्दू से ८ साल छोटा था । चन्दू को हमेशा अपना बडा भाई एवं मार्गदर्शक मानता था । चन्दू अन्तर्मुखी प्रकार का व्यक्ति था । दोनों ने मिलकर जमीन खरीदी और तय किया कि दीवार से दीवार सटाकर एक जैसा घर बनाएँगे, ताकि दोस्ती की मिसाल दी जा सके । दोनों ने मिलकर घर का काम शुरू करवाया । जब दोनों के मकान की छत–ढलान का समय आया तो चन्दू ने इंची टेप पकडा और मिस्त्री से कहा, देखो भाई, “विमल मेरे भाई जैसा है । हमारे घरों की ऊँचाई रत्ती–भर भी ऊपर–नीचे नहीं होनी चाहिए ।” दोनों घर बराबर रहेंगे तो हमारी दोस्ती की मिसाल दी जाएगी । इसके बाद चन्दू ने पहले विमल के घर की ऊँचाई की पैमाइश की और चिह्न लगवा दिए ।

विमल की सेटरिंग लग चुकी थी, तभी चन्दू ने चुपके से अपने घर की ऊँचाई ६ इंच बढ़वा ली । विमल ने जब यह देखा तो हैरानी जताई और कहा कि आपने तो बराबरी की कसम खाई थी । तो चन्दू बहाने बनाने लगा, कहने लगा कि मेरा घर दबा हुआ दिखाई देता । इसलिए ऊँचा करवा लिया, वो भी केवल छः इंच ।


यह सुनकर विमल को बहुत ठेस पहुँची । उसने कहा, अगर तुम्हें ऊँचाई ही बढानी थी, तो तुमने खुद मिस्त्री के साथ इंची टेप पकड़कर मेरे घर की पैमाइश क्यों करवाई थी ? अगर तुम उस दिन दखल न देते तो मैं अपनी मर्जी

से चाहे जितनी ऊँचाई रखता और तुम अपनी मर्जी से । लेकिन मतलब साफ था । दिखावे की ६ इंच की ऊँचाई ने सालों की दोस्ती की नींव को छोटा कर दिया था । अब घर तो बन गए लेकिन छह इंच ने दिलों के बीच मीलों की दूरी पैदा कर दी थी ।

- सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश, भारत

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