Friday, April 3, 2026

हिन्दी लघुकथा (अङ्क ३३ मा प्रकाशित)


वरुण भाई, आपकी बिटिया के लिए एक बहुत अच्छा संबंध मिला है । अपने ही शहर के रहने वाले हैं । हैं तो मिडिल क्लास लेकिन परिवार बहुत अच्छा है ।

बहुत अच्छी बात है । बेटी की इस साल शादी करनी ही है । लेकिन नीलेश भाई, लडका क्या करता है? 

लडका अभी अभी नौकरी में लगा है । बस्तर में पोस्टिंग है, लोअर डिविजन क्लर्क है । आप सरकारी नौकरी वाला लडका ही ढूंढ रहे हैं न । इसलिए मुझे लगा आपको बताऊं ।

ओह ! क्लर्क है लडका । 

जी । पिताजी भी सरकारी नौकरी में रहे हैं । अधीक्षक होकर पिछले साल ही रिटायर हुए हैं । ये बडा लडका है छोटा अभी चेन्नई में इंजीनियरिंग पढ़रहा है ।

यार नीलेश भाई ! क्लर्क है तो अभी पगार भी कम होगी । वहां अकेले रहेंगे तो खर्च कैसे चलेगा? मकान का किराया, घर के खर्चे, अपने खर्चे, बचा क्या पाएंगे?

वरुण भाई, एक बात पूछूं, बुरा तो नहीं मानेंगे?
अरे कैसी बात करते हैं, पूछिए न, आप तो पुराने मित्र हैं हमारे ।

आप की जब शादी लगी थी तब आप किस पद पर थे?
मैं क्लर्क की पोस्ट पर था । लेकिन ये बात क्यों पूछ रहे हो?

अगर तब आपके ससुर ने यही बात सोची होती जो आप कह रहे हैं तो आपकी शादी भाभी से न हुई होती । तब तो आपकी पगार मुश्किल दो ढाई सौ रुपए रही होगी । आज भले आप सेक्शन आँफिसर हो लेकिन शुरू तो आपने भी वहीं से किया था । आप रहने दीजिए इस लडके को । आप उस लडके की तलाश कीजिए जो पच्चीस छब्बीस की उम्र में लाख डेढ़ लाख कमाता हो । ये परिवार आपके लायक नहीं । 

वरुण का सर झुक गया और वो बगलें झांकने लगे ।

–भावना नगर रायपुर, छत्तीसगढ, भारत

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