Tuesday, June 16, 2026

हिन्दी लघुकथा (अङ्क ३५ मा प्रकाशित)


ऋषि गंगा घाटी में बाढ़की विभिषिका से हड़कंप मच गया, बाढ़के समय एनटीपीसी की ५२० मेगावाट तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना में न जाने कितने श्रमिक फँसे हुए हैं । राहत कार्य तेजी से चल रहा है, प्राकृतिक आपदा में फँसे श्रमिकों के परिवार में त्राहि–त्राहि मची हुई है । सूरज के पिता का तीन दिन से कहीं पता नहीं, सूरज, उसकी माँ, पत्नी व तीन बच्चों के भरण–पोषण की जिम्मेदारी पिता पर ही है । माँ, पत्नी दहाड़मारकर रो रही हैं, देखा देखी बच्चे भी रो रहे हैं ।

सूरज दिन–रात भोले बाबा के समक्ष खडे होकर पिता की सलामती के लिये प्रार्थना कर रहा है । घर में लगातार टी.वी. चल रहा है ताकि समाचार में पिता का कुछ समाचार मिले, दो दिन हो गये घर में चुल्हा जले । प्रार्थना करते–करते सूरज के कानों में समाचार पडा “आज का ब्रेकिंग न्यूज एनटीपीसी अपनी परियोजना के निमार्ण में लगी एजेंसी के मरने वाले श्रमिकों के परिवार को २०–२० लाख रुपये का मुआवजा देगी । वहीं राज्य सरकार और केन्द्र सरकारों ने भी चार लाख रुपये व दो लाख रुपये रकम दने की बात कही है । सूरज दौड़कर टी.वी. के पास गया, ध्यान से समाचार सुनकर अनुमान लगा रहा है पूरे छब्बीस लाख रुपये ।

समाचार सुनकर एक बार फिर से भगवान के आगे नतमस्तक है लेकिन उसके प्रार्थना में अब पिता की सलामती नहीं बल्कि मुआवजे की रकम शामिल है ।

– मयुर बिहार, भारत

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