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Monday, June 15, 2026

हिन्दी लघुकथा (अङ्क ३५ मा प्रकाशित)

मारिया फोन पर, “हाँ, याद है मुझे ! 

ठीक है !

(मुस्कुराते हुए) बाय मिलते हैं, शाम को ! 

आशा मारिया की ओर देखते हुए मुस्कुराती है ।

“कुछ नहीं, आशा ! इवान का फोन था । ईस्टर बास्केट और ईस्टर ब्रेड की बात चल रही थी ।”

मुस्कुराते हुए आशा, “वो मैं जान गई ।”

“आशा, इस बार हम दोनों ने यह तय किया हैं कि हम ईस्टर को बिना “नोस्टाल्जिक” हुए मनाएंगे ।

यह बात पक्की हैं कि हम अपने देश में ईस्टर, क्रिसमस और नए साल का जश्न बहुत अच्छा मनाया करते थे । ये पूरे चार साल से चले युद्ध के कारण हम दोनों ने ईस्टर और क्रिसमस आदि त्योहार आधे अधूरे  दिल से मनाए हैं ।

किंतु वर्तमान समय को देखते हुए अब लगता हैं कि कब दुनिया में शांति कायम होगी?

कब हम अपने देश लौटेंगे? 

इसलिए इस वर्ष हम ईस्टर पूरे हर्षोल्लास से यहां नीदरलैंड में मनाएंगे ।”

- एम्स्टर्डम, नीदरलैंड

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