Monday, March 3, 2025

हिन्दी लघुकथा (अङ्क २१ मा प्रकाशित)


पति –पत्नी रिक्शे में जा रहे थे, रास्ते में एक दुकान दिखाई पडी, पत्नी ने रिक्शे को दुकान के पास रुकवा दिया, पर्स से एक लिस्ट निकालकर पति को देकर बोली – यह लिजिए सभी सामान लेकर ठीक से पैक करवा लिजिएगा।

पति महोदय दुकान पर सामान ले रहे थे की तभी उन्हें कुछ याद आया, पत्नी की ओर मुड़कर पूछा – एक किलो सर्फ भी ले लूँ ?

– क्या करोगे ? पर्चे में लिखा है क्या ?

– लिखा तो नहीं है, पर घर में भी तो नहीं है, इसीलिए पूछा, की शायद तुम लिखना भूल तो नहीं गयी ।

– रहने दीजिये, मैं ले आयी हूँ ।

– दिखाई नहीं पडा, कहाँ रखा था ।

– चलिए तो दिखती हूँ ।

– पति महोदय सामान को तुरंत पैक करा कर रिक्शे में आकर बैठ गए, रिक्शा चल पडा, अभी कुछ ही दूर गया होगा की पत्नी कडे शब्दों में कहा – तुम्हे कुछ होश भी है की नहीं, अभी बच्चो की फीस जमा नहीं हुई, उसकी चिंता नहीं है, सर्फ लेने की चिंता है ।

– पत्नी की बातों सें पति महोदय को पता चल गया की सर्फ कहा रखा है, इसीलिए वह चुपचाप पत्नी की बातों को रास्ते भर मौन रहकर सुनते रहे, उन्हें अब कहना भी तो कुछ न था ।

-लखनऊ, भारत

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