Monday, March 3, 2025

हिन्दी लघुकथा (अङ्क २१ मा प्रकाशित)


“मम्मी, ये पास वाले घर मे रोने की एक जैसी  आवाज़क्यों आ रही है? क्या कोई रिकार्ड ..?’’ नौ वर्षीय भोलू ने पूछा ।

“हाँ बेटा ।  टेप  ही  बज  रहा  है । गाँव मे उनके दादाजी की डेथ हो गई थी न ! तो उनकी आज कोई तिथि है इसलिए कैसेट बजाना पडती है रोने की ।  अब इतने बूढे आदमी के मरने पर किसी को बार–बार रोना कहाँ आता है ? तो बस, रिकार्डिङ्ग बजा देते हैं रोने की ।’’ स्नेहा ने समझाया ।

“तो उससे क्या सब लोग रोने लगते हैं?’’

“हाँ’’

“फिर तो  हमारे घर मे  हँसने की रिकार्डिङ्ग बजानी चाहिए । अपने घर में कभी कोई हँसता नही न ! हँसने की रिकार्ड बजने से हम सबको भी  हँसी आ जाएगी न मम्मी?’’

भोलू का भोला तर्क सुन सारे तने हुए चेहरों पर मुस्कान आ गयी, लंबे समय बाद ।

– सुदामा नगर, आगर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) भारत

---------------------------------------

.‍..‍.‍.‍साथ सहयोगको खाँचो
लघुकथा संसार र कविता संसार अनलाइन मासिक पत्रिकालाई
जीवित राख्नका लागि तपाईंको 
आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण हुन्छ ।

No comments:

Post a Comment