“मम्मी, ये पास वाले घर मे रोने की एक जैसी आवाज़क्यों आ रही है? क्या कोई रिकार्ड ..?’’ नौ वर्षीय भोलू ने पूछा ।
“हाँ बेटा । टेप ही बज रहा है । गाँव मे उनके दादाजी की डेथ हो गई थी न ! तो उनकी आज कोई तिथि है इसलिए कैसेट बजाना पडती है रोने की । अब इतने बूढे आदमी के मरने पर किसी को बार–बार रोना कहाँ आता है ? तो बस, रिकार्डिङ्ग बजा देते हैं रोने की ।’’ स्नेहा ने समझाया ।
“तो उससे क्या सब लोग रोने लगते हैं?’’
“हाँ’’
“फिर तो हमारे घर मे हँसने की रिकार्डिङ्ग बजानी चाहिए । अपने घर में कभी कोई हँसता नही न ! हँसने की रिकार्ड बजने से हम सबको भी हँसी आ जाएगी न मम्मी?’’
भोलू का भोला तर्क सुन सारे तने हुए चेहरों पर मुस्कान आ गयी, लंबे समय बाद ।
– सुदामा नगर, आगर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) भारत
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