Thursday, December 5, 2024

हिन्दी लघुकथा (अङ्क १८ मा प्रकाशित)

 दुसरों को नसीहत

- प्रेम विज
कोठी नंबर 1284, सैक्टर घठ बी चंडीगढ 160036   


नेता जी ने स्कूल के समारोह में भाषण देते हुए कहा, “नकल हमारे समाज के माथे पर कलंक है । इस बुराई को दूर करने के लिए हम सभी को प्रयत्न करने चाहिए । 

इसमें अध्यापकों के साथ-साथ अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है । माता-पिता को भी बच्चों में ऐसे संस्कार उत्पन्न करने चाहिए, जिससे वे इस बुरी आदत से दूर रहें । इस बुराई से अच्छे बच्चों का भविष्य धूमिल हो जाता है । यदि इस बुराई को अभी से रोका ना गया तो यह बढ़ती-बढ़ती विकराल रूप धारण कर सकती है ।’’ विद्यार्थी और अध्यापक उनके भाषण से गदगद हो रहे थे ।

कुछ ही दिनों के बाद नेता जी को स्कूल में घूमते देख मैं बहुत हैरान हुआ । पूछने पर पता चला कि वह अपने बच्चे को पास करवाने के लिए मुंह मांगा दाम देने के लिए तैयार हैं । स्कूल भी वही था, अध्यापक भी वही सिर्फ नसीहत देने वाला बदल गया था ।


....साथ सहयोगको खाँचो

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