Friday, January 24, 2025

हिन्दी लघुकथा (अङ्क २० मा प्रकाशित)


 

मैं बाइक से आफिस जा रहा था, तभी मैंने रास्ते में देखा एक आठ–नौ साल का मैले–कुचैले कपडे पहने बालक एक चाट के ठेले के आसपास गिरे खाने के सामान को उठाकर खा रहा था । यह देख मैंने बाइक रोक कर उससे कहा –“बेटा ! चलो मैं तुम्हें कुछ खाने के लिए दिलवा देता हूँ । तुम जमीन पर गिरी चीजें मत खाओ, वरना बीमार पड जाओगे ।’’

वह मेरी तरफ देखकर बोला – “बाबूजी ! आप मुझे एक बार खिला देंगें, लेकिन दोबारा मुझे खाने के लिए यहाँ आना ही पडेगा । रही बात ये गिरी चीजें खाने की, तो मैं अच्छे घर का बच्चा तो हूँ नहीं, जो जमीन पर गिरी चीजें खाकर बीमार पड जाऊँगा । मुझे तो इसकी आदत पड़चुकी है…।’’ इतना कहकर वह फिर जमीन पर पडी खाद्य सामग्री उठाने में लग गया ।

- सूर्यदेव नगर, इंदौर–४५२००९, मध्यप्रदेश भारत

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