शीला को उस की पचासवीं वर्षगाठ पर एक ऐसा उपहार मिला जिस को देखते ही वह हक्की – बक्की हो गयी ।अगले दिन वह जा धमकी पूजा के घर ।
“तुम इस साडी को पहचानती न ?’’ शीला ने तमतमाते हुए पूजा से पूछा ।
साडी को देख कर पूजा के पसीने छूट गये ।
“नहीं तो ।’’
“क्यों बनती हो ? ये वही साडी है जो मैंने बडी रीझ से तुम्हारी बेटी कमलेश के ब्याह पर उस को दी थी । साडी उठा कर तुमने सावित्री को दे दी, न जाने किस खुशी के अवसर पर ? तुम क्या जानो उपहार का मान करना ?’’ कह कर शीला जैसी आयी थी वैसी ही मुड़गयी ।
– भारत

No comments:
Post a Comment