ट्रेन से जैसे ही उमेश बाबू आठ नंबर प्लेटफार्म पर उतरे । एक बूढा कुली आ खडा हुआ ।
“बाबूजी कुली लगेगा ?’’
“हां जरूर, लेकिन एक नंबर प्लेटफार्म के बाहर चलना होगा ।’’
“चलूँगा, सौ रुपए लगेंगे बाबूजी ।’’
“ले लेना, चलो सामान उठाओ ।’’
नियत स्थान पर सामान उतारने के बाद । पसीने से तरबतर हाँफता कुली बोला ।
“बाबूजी पानी है ?’’
“हां है, ये लो ।’’ उमेश बाबू ने पानी की बोटल आगे बढा दी ।
कुली ने तेजी से टैबलेट के पत्ते में से एक टैबलेट निकाली और पानी के साथ निगल गया ।
“काहे की टैबलेट है ये ।’’ सौ रूपये देते हुए उमेश बाबू ने पूछा ।
“हार्ट की है बाबूजी ।’’
“तुम हार्ट के मरीज हो तो घर आराम क्यों नहीं करते ? ऐसी हालत में भारी भरकम काम करना, खतरे से खेलना है आग से खेलना है ।’’
“एक बात बोलूँ बाबूजी, पेट की आग से बढकर कोई आग नहीं होती ।’’
– भारत
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