Tuesday, October 13, 2026

हिन्दी लघुकथा (अङ्क ३९ मा प्रकाशित)


गया प्रसाद कई दिन से आँख की पीडा से परेशान थे । बेटों से कहते तो बेटे आजकल–आजकल लगा रहे थे ।

हार कर एक सुबह बडे बेटे को आँफिस जाते हुए टोका – बेटा, आज जल्दी आ जाना, आँख वाले डाँक्टर को दिखा देना ।

बेटा बोला – आज तो ग्रंथी मीटिंग है । जल्दी ही आजकल में चलकर दिखा देते हैं ।

बाप–बेटे में नोक–झोंक हो ही रही थी कि टीवी पर एंकर जाति का आँकडा समझा रहा था – बीस हजार इस तरफ, पंद्रह हजार उस तरफ, पूरी जाति इसी नेता के साथ ।

गया प्रसाद जब दुखती आँखों से बेटे को आँफिस जाते देख रहे थे तभी उनको टीवी एंकर की बात आयी और मन ही मन बोले – एक बेटा बाप के कहने पर डाँक्टर तक नहीं ले जा रहा, और ये पूरी जाति को हाँक रहे हैं । मेरी तो एक ही आँख दुख रही है, इनकी तो दोनों आँखें ही सच देखना नहीं चाहतीं ।

– १३६–मयूर रेजीडेसी, फरीदी नगर लखनऊ–भारत

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