गया प्रसाद कई दिन से आँख की पीडा से परेशान थे । बेटों से कहते तो बेटे आजकल–आजकल लगा रहे थे ।
हार कर एक सुबह बडे बेटे को आँफिस जाते हुए टोका – बेटा, आज जल्दी आ जाना, आँख वाले डाँक्टर को दिखा देना ।
बेटा बोला – आज तो ग्रंथी मीटिंग है । जल्दी ही आजकल में चलकर दिखा देते हैं ।
बाप–बेटे में नोक–झोंक हो ही रही थी कि टीवी पर एंकर जाति का आँकडा समझा रहा था – बीस हजार इस तरफ, पंद्रह हजार उस तरफ, पूरी जाति इसी नेता के साथ ।
गया प्रसाद जब दुखती आँखों से बेटे को आँफिस जाते देख रहे थे तभी उनको टीवी एंकर की बात आयी और मन ही मन बोले – एक बेटा बाप के कहने पर डाँक्टर तक नहीं ले जा रहा, और ये पूरी जाति को हाँक रहे हैं । मेरी तो एक ही आँख दुख रही है, इनकी तो दोनों आँखें ही सच देखना नहीं चाहतीं ।
– १३६–मयूर रेजीडेसी, फरीदी नगर लखनऊ–भारत
..............................................................................
....साथ सहयोगको खाँचो
लघुकथा संसार र कविता संसार अनलाइन मासिक पत्रिकालाई
जीवित राख्नका लागि तपाईंको
आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण हुन्छ ।
जीवित राख्नका लागि तपाईंको
आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण हुन्छ ।


No comments:
Post a Comment