Tuesday, October 13, 2026

हिन्दी लघुकथा (अङ्क ३९ मा प्रकाशित)


सुमन की मुलाकात हाल ही में काँलोनी में नई–नई आई सुधा से पार्क में हुई । दोनों आपस में बातें करती–करती टहल रही थी । उसी समय सुमन का मोबाईल बजा, सुमन की उम्र थोडी ज्यादा थी, उसे थोडी सी सुनने की दिक्कत थी, जिस कारण वह मोबाईल का स्पीकर आँन करके बोली–  "हैलो, कैसी हो, ठीक तो है ना ? कैसे फोन किया ?"  दूसरी तरफ से आवाज आई–  "हाँ, ठीक हूँ, सुबह छत पर टहल रही थी, दो दिन से आपसे बात नहीं हुई, इसलिए बस यूँ ही फोन कर लिया ।" 

सुमन ने फिर कहा–  "इन दिनों अच्छे से खाने–पीने का ध्यान रखा करो । हाँ थोडी गर्मी भी ज्यादा है । धूप में मत निकला करो, प्रेग्नेंसी में नारियल का पानी पीना अच्छा रहता है, रोज पिया करो, कोई दिक्कत हो तो तुरन्त फोन करना, मैं आ जाऊँगी ।" 

"हाँ–हाँ, दिक्कत होगी तो आपको जरूर बुलवा लूंगी, अभी सब ठीक है, वो नीचे से आवाज लगा रहे है, मैं फिर फोन करुँगी ।" – कहते–कहते फोन काट दिया । 

फोन कटा तो सुधा बोली–  "बहिन, चलूं मैं, बहुत देर हो गई ।" चलते–चलते सुधा ने फिर प्रश्न किया –  "आपकी बेटी कहाँ रहती है ? दामाद क्या करते हैं ?"  सुमन ने मुस्कुरा कर कहा –  "मेरे दो बेटे ही हैं ।"

– सवाई माधोपुर, राजस्थान ३२२००१ भारत

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